मंगलवार, मार्च 01, 2011

बातें राजस्थान की


किसी कला की कमी नहीं, ना कमी है स्वाभिमान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥

वीरों के पौरूष में भी यहां ईश्वर का वरदान है ।
दानव के आगे नही झुकते, मानव का सम्मान है ॥
पन्ना धाय के त्याग को देखो, भूख नही धन धान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

अमरसिंह के अटल इरादे, महाराणा के तेवर हो ।
जहां चेतक जैसी स्वामी भक्ति, घुंघट जैसा झेवर हो ॥
जहां मीरां की पावनता से विष, बने औषधि प्राण की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

महल, हवेली, किले झरोखें कितनी कलायें लाया है ।
इस भूमि का पत्थर लगकर, ताजमहल बन पाया है ॥
याद रहेगी सबको ये, सौगाते राजस्थान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

एल. एन. मित्तल, प्रतिभा पाटिल, भैरोसिंह से नाम हुए ।
तारकीन और खवाजाजी, यहां सुफी के सम्मान हुए ॥
यहां पे आदर रामायण का, इज्जत यहां कुरान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

कालबेलिया, माड गायकी, कठपुतली के खेल है ।
सब का सबसे नाता है, यहां सबका सबसे मेल है ॥
चेहरे पर है भोलापन, और मूंछे बड़ी है मान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

यहां मौसम बड े निराले है, यहां मेले बड े सुहाते है ।
पुष्कर में गर्मी में भी गौरे सैलानी आते है ॥
आबू की ठंडक से देखें शामें राजस्थान की ।
और जैसलमेर के द्योरो में हो रातें राजस्थान की ॥
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

गणगोरों के मेले है, यहां हर महीने त्योंहार है ।
है सम्मान बुजुर्गो का यहां सामूहिक परिवार है ॥
और बुश, क्लिटंन, ओबामा से, मुलाकातें राजस्थान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

सब है एक समान, वो चाहे राजा है या फकीर है ।
हिन्दु मुस्लिम दोनो पूजे, वो रामदेवसा पीर है ॥
सोने जैसी मिट्‌टी है, सुहानी राजस्थान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

चुनरी वाली साड़ी में तो लगती दुल्हन जानकी ।
यहां की नारी चुनरी को ही अपना जेवर मानती ॥
और चुनरी वाले साफों में बारातें राजस्थान की ।
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........

यह सब पिछले युग की बातें अब तो अपनी बारी है ।
इस भूमि की शान बढाना, अपनी जिम्मेदारी है ॥
पिछले युग के शूरों ने तो, सदा ही बाजी मारी है ।
मरूभूमि के वीर सपूतों, अब की क्या तैयारी है ॥

मेरे भाई बन्धु सुनलो, मुझ छोटे इन्सान की ।
कभी ना आये वो दिन, हो बदनामी राजस्थान की ॥
इसीलिये सब करते रहते बातें राजस्थान की ॥ किसी कला ........
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