मंगलवार, मार्च 01, 2011

devee ree andekhee

नारी री कोख सूं जन्म लियो, और देवी नं अे ध्यावें है।
ई बात सूं पण डरियोड़ा है, कि कन्या घर में आवें है॥
जिण नें लिछमी बतळावें है, हर पल जिणरां गुण गावें है।
बा खुद ही घर में आती हुवे तो झट तलवार चलावे है॥
ऐ धन खातर ही लिछमी पूजे, और शक्ति खातर दुर्गा।
पण बेटी बणकर देवी आवे तो वादे सूं फुरगा॥
जोरू री तो आस करे, बिमें अे नखरा खास करे।
दुनिया देखी है ऐ बाता के जळा के जोरू लाश करे॥
ऐ देव बराबर मांगे इज्जत, खुद गली गली मैं रास करे।
नारी तो जग में देवी है, जो कैसा कैसा उपवास करे ॥
भारत माता ने बेच्या बे, भूखड ल्या भूप पुजीजे है।
ममता री भूख रही कोनी, मिस इंडिया रा रूप पूजीजै है॥
सातूं सुख घर में आसी और लाखू दुखड रैसी कोनी।
जद हिन्दुस्तानी यूँ केवला, बेट्‌याँ सू धन बेसी कोनी॥
written & copy-right by MANOJ HINDUSTANI

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