बुधवार, दिसंबर 07, 2011
जन्म-मरण
बूँद गगन की मेरा बचपन
बूँद धरा की मेरा यौवन
बूँद-ए-सागर हुआ बुढापा
भाप हो जैसे ख़त्म कहानी
फिर से बूँद, नया है जीवन
कैसा पतझड़ कैसा सावन?
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