आज सूणी हूं, नेताजी मिलणे आवेगा
जनता न वे खूब दिया, जो अब पावेगा॥
राशन री लाईन सूं ले आंखया री लाली।
सब देवांला, जनता तैयारी ने चाली॥
ओ खूब हुयो, अब हाल नहीं राखयोआछो।
म्हें शेर बणाया, स्वान बणास्यां अब पाछो॥
मिनखां ने तो ऐ वोट गिणे, खुद कुर्सी नीचे नोट गिणे।
जनता ने ढांढा समझे है, खुद में ना कोई खोट गिणे॥
एै चौराया चमकावण ने, लोगां रा घर तुड़वावे है।
अर खुद लोगां सूं माल पटा, खुद री कोठ्या चिणवावे है॥
रे जनता पर हंसणे वाळा, जनता कोई जोकर कोनी।
अब कुर्सी बां ने नही मिले, जो जनता रा नौकर कोनी॥
थे सरकारां की सैण करी, ऐ म्हारी बातां सैण करो।
रामराज आवेला पाछो, म्हासूं इतनो बेण करों॥
…




व्हाला भाई मनोज हिंदुस्तानी जी
जवाब देंहटाएंघणैमान रामराम !
आपकी कविता में आम हिंदुस्तानी की पीड़ा समाहित है …
मिनखां ने तो ऐ वोट गिणे, खुद कुर्सी नीचे नोट गिणे।
इन पंक्तियों से कविता का प्रवाह बहुत प्रभावी है …
… बस, चित्रों का चयन सावधानी से किया करें …
हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएं !
- राजेन्द्र स्वर्णकार