सोमवार, जनवरी 09, 2012

था रूप जिन्दगी में

था रूप जिन्दगी में,था रंग जिन्दगी में!
अब जिन्दगी में यारों,वो बात नहीं है!!

अंधियारे रास्ते है ,घबरा रहा हूं कुछ मैं!
कल कल तक जो साथ में था, वो साथ नहीं है!!

आँखें भी यार मेरी,लगता है थक गयी है !
वो ,रात लग रही, है, जो रात नहीं ,,है!!

पाती भी दे चुका हूं,दर भी खुला है मेरा!
होनी जरूर थी जो, मुलाकात नहीं है!!

मुस्कान मिल रही थी,दीदार से भी जिनके!
किस्मत में यार वो भी, सौगात नहीं है!!

क्या है गलत सही क्या,अब कौन ये बताये!
सर पे जो मेरे कल था, वो हाथ नहीं है!!

सपने निगाह में थे,मुट्ठी में थे सितारे!
सब कुछ बदल गया है,वो हालात नहीं है!!
written by MANOJ HINDUSTANI

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूबसूरत.
    मेरे ब्लॉग" meri kavitayen" की नयी पोस्ट पर भी पधारने का कष्ट करें.

    जवाब देंहटाएं
  2. ‎.
    27Aug.2012

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    प्रियवर मनोज हिन्दुस्तानी जी
    सस्नेह अभिवादन !
    *जन्मदिन की हार्दिक बधाई !*
    **हार्दिक शुभकामनाएं !**


    सम्पूर्ण ह्रदय से आशीर्वाद !
    ****मंगलकामनाएं !****
    राजेन्द्र स्वर्णकार
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